0 0 lang="en-US"> कोई क्यों चला जाता है - The Vent Machine
Site icon The Vent Machine

कोई क्यों चला जाता है

Advertisements
Read Time:3 Minute, 26 Second

से बड़ी इस दुनिया में कोई सच्चाई नहीं होती है
इस एहसास को हम ज़िन्दगी जीने में मशगूल होकर अक्सर भूल जाते हैं

थोड़ा अजीब लगेगा आपको सुनकर लेकिन मुझे मौत समझ में नहीं आती
क्यों कोई दुनिया से चला जाता है ?
जो भला है, अच्छा काम कर रहा है,
क्यों उसे भगवान् हमसे दूर कर देते हैं ?

इतने डाकू, चोर, उचक्के धड़ल्ले से ज़िन्दगी जीते हैं
और उनकी जगह भले इंसान बस एक झटके में चले जाते हैं ..
क्यों ?

हाल में मैंने दो क़रीबी लोगों को एक झटके में
एक ही हादसे के हाथों खो दिया
एक बाज़ के नाम से लिखने वाला प्यारा दोस्त था
और दूसरा “मूल” नाम का बड़े भाई जैसा साथी
एक ने हमेशा मेरी रचनाओं को, मेरे काम को, लायक से ज़्यादा इज़्ज़त दी थी
और दुसरे ने मुझे हमेशा कामयाबी की फ़लक पे बिठा कर सराहा था

बाज़ से मैं 7 जून को मिलने वाली थी
हमारी चैट हुई थी व्ट्सॅअप पर
मूल सर के साथ तीन प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा था
उनका फेसबुक पर रविवार रात को मैसेज आया था
सिंगापुर इंडिया से ढाई घंटे आगे है
उस वक़्त मैं नींद में थी
मैसेज के बीप से नींद खुली लेकिन सोचा की सुबह जवाब देती हूँ

उसी रात लगभग 3 या 4 बजे एक सड़क हादसे में दोनों चल बसे
अब 7 जून में दिल्ली में होने से डर लग रहा है
और फेसबुक पर मैसेंजर में मूल सर का मैसेज अब भी अनरेड है

मेरी माँ सिंगापुर आयी हुई हैं
इसलिए थोड़ी व्यस्त थी
तो पता भी काफी देर से चला
जब से मालूम हुआ है
बहुत कोशिश कर रही की उनके परिजनों के लिए प्रार्थना करूँ और थोड़ा ध्यान हटा सकूँ
लेकिन रात को नींद नहीं आ रही आज कल…
व्ट्सअप्प, फेसबुक हर जगह पहली दफ़े भगवान् की तस्वीर लगायी है
क्यूंकि उनसे भीक मांग रही दिन रात
एक – की बाज़ और मूल सर के परिवार को शक्ति दें
दूसरा -की उसी हादसे में ज़ख़्मी हुए शाहिद सर को ठीक कर दें

लेकिन सदमा गहरा है
जी रही हूँ – सब कर रही
ब्लॉग्स लिखना, माँ को सिंगापुर दिखाना
लेकिन ज़हन का एक हिस्सा है जो उस पल में अटका है
जब अजीत पणिकर सर से बात कर के दुःख बयान किया था कि ये क्या हो गया
रूह के एक टुकड़ा वहां अटका है जब मूल सर के परिवार से पता चला कि शहीद सर ICU में हैं

मौत अजीब है
कब कहाँ किसे अपने आगोश में ले ले पता नहीं
इसलिए जब तक हैं और जो-जो हैं
प्यार, इज़्ज़त और वक़्त बाटें
पता नहीं
कब कौन साथ छोड़कर चला जाये
पता नहीं
कब हम ही इस दुनिया से चले जाएँ…

 

About Post Author

Surabhi Pandey

A journalist by training, Surabhi is a writer and content consultant currently based in Singapore. She has over ten years of experience in journalistic and business writing, qualitative research, proofreading, copyediting and SEO. Working in different capacities as a freelancer, she produces both print and digital content and leads campaigns for a wide range of brands and organisations – covering topics ranging from technology to education and travel to lifestyle with a keen focus on the APAC region.
Happy
0 0 %
Sad
0 0 %
Excited
0 0 %
Sleepy
0 0 %
Angry
0 0 %
Surprise
0 0 %
Exit mobile version