Blur

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Days are blurred A Chaos... they just pass In work, In joy, In Sadness They seem to be running I feel I am behind time Unable to catch a break Everything is a haze A lot is going on they say it is good - To be busy, to remain occupied To be involved in... Continue Reading →

नहीं देख सकती

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तुम्हारी उदासी तुम्हारी परेशानियां नहीं देख सकती तुम्हारी आँखों में आंसू, तुम्हारे माथे पर शिकन नहीं देख सकती मुश्किल है नज़ारा तुम्हारे दुःख के मंज़र का निराशा भरी आँखें और दुखी चेहरा तुम्हारा नहीं देख सकती नहीं मंज़ूर है कि कोई मुश्किल वक़्त तुम्हे छूए नहीं पसंद कि तुम्हारे चेहरे कि हँसी कहीं खोये तुम्हारी... Continue Reading →

तू मत डर, बस प्यार कर

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माना मैं थोड़ी खुले मिजाज़ की हूँ आज़ाद ख़यालों की हूँ, बेबाक जज़्बात हैं मेरे लेकिन ए दोस्त, मैं बेवफा नहीं माना मुझे हसना बोलना पसंद है माना मैं थोड़ी उन्मुक्त स्वभाव की हूँ लेकिन ए हमसफ़र, मैं सिर्फ़ तेरी हूँ दूसरों की बातों में मत आया कर अपने दिल की सुन, खुद को समझाया... Continue Reading →

PINK IS THE NEW WHITE. IT IS PEACE. SOLACE.

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Not that Mr. Bachchan needs to establish anything about his extraordinary acting skills but through PINK he has definitely done it for the trillionth time . He re-establishes the fact ki "Rishtey me wo sab k Baap k lagte hain", when it comes to bringing a character to life on the silver screen. His flawless portrayal... Continue Reading →

मैं हूँ

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जिस तरह चाहती हूँ उस तरह नहीं लेकिन हाँ, मैं हूँ मैं उसकी राहत हूँ, मैं उसकी चाहत हूँ जिस तरह सोचती हूँ उस तरह नहीं लेकिन हाँ, मैं हूँ मैं उसका प्यार हूँ, उसकी ज़िन्दगी में शुमार हूँ जिस तरह के सपने हैं वैसे नहीं लेकिन हाँ, अस्तित्व है उस ख्वाब का, उस ख्वाहिश... Continue Reading →

मैं दंग हूँ

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मैं दंग हूँ लोगों के बचपने पे उनकी बेवकूफियों पे मैं दंग हूँ कोई उम्र में छोटा है तो उसको कुछ भी बोल दो कोई काम पे नया है तो उसके नाम पर खेल दो मैं दंग हूँ अपनी सीमाएं लाघने में इन लोगों को कोई शर्म नहीं क्या कह रहे क्या कर रहे -... Continue Reading →

थोड़ा सा, जी भर के जी लेता हूँ

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ऑटो में मेट्रो में बाइक की सवारी पर थोड़ा सा, जी भर के सो लेता हूँ तकलीफों को मुश्किलों को दर्द को सोच के, थोड़ा सा, जी भर के रो लेता हूँ ये करता हूँ अक्सर दफ्तर जाते हुए रोज़ सुबह क्योंकि वक़्त नहीं है आवा जाहि खर्च कमाई में इस कदर बीत रही ज़िन्दगी... Continue Reading →

कश्मकश

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कश्मकश में जी रही क्या ग़लत क्या सही कुछ पता नहीं कुछ अता नहीं कहना कुछ चाहती हूँ करना कुछ और हो कुछ जाता है आता समझ कुछ और अपने दिल से मजबूर हूँ दिमाग की ग़ुलाम बेबस हूँ बेवक़ूफ़ हूँ और लोगों में बदनाम कश्मकश में जी रही क्या गलत क्या सही कुछ पता नहीं... Continue Reading →

I wish I was like Dumbledore

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I wish I was like Dumbledore (though there are many ways, in which I would want to be like him but) Today, here, I talk about the beautiful privilege of storing thoughts I wish I was like Dumbledore (though I wouldn't mind all other wonderful traits and magical powers but) Today, here, I talk about the... Continue Reading →

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