तू मत डर, बस प्यार कर

तू मत डर, बस प्यार कर

माना मैं थोड़ी खुले मिजाज़ की हूँ आज़ाद ख़यालों की हूँ, बेबाक जज़्बात हैं मेरे लेकिन ए दोस्त, मैं बेवफा नहीं माना मुझे हसना बोलना...
मैं हूँ

मैं हूँ

जिस तरह चाहती हूँ उस तरह नहीं लेकिन हाँ, मैं हूँ मैं उसकी राहत हूँ, मैं उसकी चाहत हूँ जिस तरह सोचती हूँ उस तरह...
मैं दंग हूँ

मैं दंग हूँ

मैं दंग हूँ लोगों के बचपने पे उनकी बेवकूफियों पे मैं दंग हूँ कोई उम्र में छोटा है तो उसको कुछ भी बोल दो कोई...
कश्मकश

कश्मकश

कश्मकश में जी रही क्या ग़लत क्या सही कुछ पता नहीं कुछ अता नहीं कहना कुछ चाहती हूँ करना कुछ और हो कुछ जाता है आता...
It Comes Naturally.

It Comes Naturally.

Do I Know What I am going to write before I complete? No, I don't. Actually, I don't know it even when  I start I...