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November 2, 2016 Surabhi Pandey 2

Tried. Wanted To. Can’t. Advertisements

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बड़े दिनों बाद लिख रही

October 18, 2016 Surabhi Pandey 4

आज बड़े दिनों बाद लिख रही व्यस्त थी, सफर कर रही थी… घर जाकर आना एक भावुक चर्या रही है हमेशा इस बार कुछ ज़्यादा सराबोर थी छुट्टियां भावनाओं से

Journos- A Breed Always Taken for Granted

October 6, 2016 Surabhi Pandey 1

It is a matter of shame and contempt that in an age of candle marches and Facebook petitions about every single thing, we still live a backward philosophy. The idea

Musings

October 5, 2016 Surabhi Pandey 0

Conundrum, cobwebs, confusion, Desire There is this, There is that wanting More – as a Matter of Fact! Deadlines, Meetings, Writing, Reading Teaching, Learning, Round-the-clock Networking Working More to Get

दोस्ती हसीन है

October 4, 2016 Surabhi Pandey 5

दोस्ती हसीन है ये दुःख सुख का साथी है, एक सहारा है जब कोई साथ ना दे, तब भी ये हमारा है दोस्ती ज़िन्दगी है ये अनोखा और अजीब है

नहीं देख सकती

September 24, 2016 Surabhi Pandey 4

तुम्हारी उदासी तुम्हारी परेशानियां नहीं देख सकती तुम्हारी आँखों में आंसू, तुम्हारे माथे पर शिकन नहीं देख सकती मुश्किल है नज़ारा तुम्हारे दुःख के मंज़र का निराशा भरी आँखें और