ट्रेन लेट है

ट्रेन लेट है

हाँ तो ट्रेन लेट है... यही कुछ आठ-दस घंटे से.. लेकिन ये तो आम बात है भारतीय रेल के लिए.. वो भी दिल्ली बिहार रूट...
कोई क्यों चला जाता है

कोई क्यों चला जाता है

जब तक हैं और जो-जो हैं
प्यार, इज़्ज़त और वक़्त बाटें
पता नहीं
कब कौन साथ छोड़कर चला जाये
पता नहीं
कब हम ही इस दुनिया से चले जाएँ…

अस्तित्व

अस्तित्व

कि बटुए से झांकती वो शिल्पा की लाल बिंदी की पत्ती, एक अलग कहानी सुनाती है... तुम्हारे बदन पे जचती जीन्स और जैकेट से परे,...
“दही चूड़ा” और बिहार

“दही चूड़ा” और बिहार

मैं 2008 में बारहवीं की परीक्षा के बाद दिल्ली चली गयी थी | आठ वर्ष तक पत्रकारिता की पढाई व नौकरी में इसी शहर में...
कि अँधेरा घना है

कि अँधेरा घना है

  कि अँधेरा घना है कोई नयी बात नहीं है ये कुछ अचानक नहीं हुआ मालूम था शुरुआत से क़ि जब तक काम की हूँ...
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