हिंदी रचनायें

#हिंदी रचनायें

वो प्यार करता है

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वो प्यार करता है समझाता है, समझता है मेरी बातों को परखता है   जब बिना बात मैं लड़ जाऊं बचकानी ज़िद पे अड़ जाऊं जब मैं उसकी बातों को […]

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मेरे हिस्से की कहानी

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मेरे हिस्से की कहानी कौन सुनेगा? मेरे जज़्बात, मेरे आंसू कौन देखेगा? वो कहता है कि मैं उसे नहीं समझती उसके हालात उसकी तकलीफें नहीं जानती वो कहता है मैं […]

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नैन्सी

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पागल सी है झल्ली सी है फिर भी अच्छी लगती है इस खोखली झूठी दुनिया में एक वो है जो सच्ची लगती है हम सबको हसाती है, जाने क्या क्या […]

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ना जाने क्या?

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ना जाने क्या सोचता रहता है मुझसे तो कुछ कहता नहीं उसकी नम आँखें और शांत सा चेहरा देख कर दिल मेरा टूट सा जाता है ना जानें किन चीज़ों […]

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यूँ ही

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न इसके लिए अच्छी ना उसके लिए काफ़ी न इसके हिसाब से ना उसके मुताबिक़ क्या है तरीका ए मालिक़ बता दो कि कर सकूँ कुछ अच्छा तुम मुझको दुआ […]

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बड़े दिनों बाद लिख रही

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आज बड़े दिनों बाद लिख रही व्यस्त थी, सफर कर रही थी… घर जाकर आना एक भावुक चर्या रही है हमेशा इस बार कुछ ज़्यादा सराबोर थी छुट्टियां भावनाओं से […]

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दोस्ती हसीन है

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दोस्ती हसीन है ये दुःख सुख का साथी है, एक सहारा है जब कोई साथ ना दे, तब भी ये हमारा है दोस्ती ज़िन्दगी है ये अनोखा और अजीब है […]

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नहीं देख सकती

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तुम्हारी उदासी तुम्हारी परेशानियां नहीं देख सकती तुम्हारी आँखों में आंसू, तुम्हारे माथे पर शिकन नहीं देख सकती मुश्किल है नज़ारा तुम्हारे दुःख के मंज़र का निराशा भरी आँखें और […]

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तू मत डर, बस प्यार कर

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माना मैं थोड़ी खुले मिजाज़ की हूँ आज़ाद ख़यालों की हूँ, बेबाक जज़्बात हैं मेरे लेकिन ए दोस्त, मैं बेवफा नहीं माना मुझे हसना बोलना पसंद है माना मैं थोड़ी […]

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मैं हूँ

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जिस तरह चाहती हूँ उस तरह नहीं लेकिन हाँ, मैं हूँ मैं उसकी राहत हूँ, मैं उसकी चाहत हूँ जिस तरह सोचती हूँ उस तरह नहीं लेकिन हाँ, मैं हूँ […]

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मैं दंग हूँ

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मैं दंग हूँ लोगों के बचपने पे उनकी बेवकूफियों पे मैं दंग हूँ कोई उम्र में छोटा है तो उसको कुछ भी बोल दो कोई काम पे नया है तो […]

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थोड़ा सा, जी भर के जी लेता हूँ

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ऑटो में मेट्रो में बाइक की सवारी पर थोड़ा सा, जी भर के सो लेता हूँ तकलीफों को मुश्किलों को दर्द को सोच के, थोड़ा सा, जी भर के रो […]

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कश्मकश

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कश्मकश में जी रही क्या ग़लत क्या सही कुछ पता नहीं कुछ अता नहीं कहना कुछ चाहती हूँ करना कुछ और हो कुछ जाता है आता समझ कुछ और अपने दिल […]

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सफ़र को ख़ूबसूरत हमसफ़र ही बनाता है…

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ये सच है… सही इंसान के साथ हाईवे के ढाबे पर बैठ कर एक प्याली चाय और पराठे में भी ख़ासियत नज़र आती है…. उसके साथ सफ़र इतना हसीं लगने […]

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च्यास…

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पता ही नहीं चला कि कब तुम मेरी ज़िन्दगी में इतनी महत्वपूर्ण हो गयी… न जाने कौन से साल का वो कौन सा महीना था, जब मुझे तुम्हारे बिना सवेरे […]

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जो हुआ ठीक ही हुआ…

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जो हुआ ठीक ही हुआ गर तुम होते तो फिर कुछ कर बैठते जो इस दिल को ठीक नहीं लगता नागवार गुज़रता मुझे जो हुआ ठीक ही हुआ गर तुम […]

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