गर कवी न होता…

तस्सवुर का आलम और आशिकी का मौसम ये सारे कितने बेनूर होते गर कवी न होता… चाहत की मंज़िल और … More

घर से घर तक

पच्चीस दिन बीत गए | सिंगापुर से दिल्ली, दिल्ली से छपरा, वहां से बेगूसराय, वहां से पटना और फिर दिल्ली … More

Happy Father’s Day🙏🏻☺️❤️

सर पे चार-चार पिता स्वरुप पेड़ों की छांव में ज़िन्दगी कड़ी से कड़ी धूप भी बिना झुलसे निकल जाती है … More

बस यूँ ही

तो एक और सफ़र ख़त्म हुआ… इस बार कई वर्ष बाद माँ के साथ लगभग बीस दिन रही… सिंगापुर से … More

माँ कहती है

जब हम छोटे थे मम्मी एक बात हमेशा कहती थी कि कोई भी तालीम कभी ज़ाया नहीं जाती | वो … More

खिलौने और बचपन

अक्सर घरों में बच्चों के लिए ढेर सारे सॉफ्ट टॉयज़ लाये जाते हैं | ये एक आम बात है | … More

मुट्ठी भर मिट्टी पैक कर लूँ

मन कर रहा है कि मुट्ठी भर मिट्टी पैक कर लूँ वो खाये हुए आमों की गुठलियां भी सुखा कर … More

जड़ों के क़रीब आती है मिटटी की ख़ुश्बू

कल शाम को छपरा पहुंची | माजी पापा (दादा दादी) से मिलकर हमेशा अच्छा लगता है, लाज़मी है | लेकिन … More