“मेरा भारत महान ” – अभिषेक पाण्डेय

“मेरा भारत महान “
            ये एक जुमला हम सभी तब से सुनते आ रहे हैं जब से हमने होश सम्हाला है , या यूँ कहें जब से हमे चीजों की समझ हुई है । यूँ तो हर भारतीय के मुखारबिंद से गाहे-बगाहे आपको “मेरा भारत महान “सुनने को मिलता ही होगा ,और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि देश के नागरिक होने के नाते आपको अपने देश का और इसके कानूनों का सम्मान करना चाहिए । लेकिन यहां एक प्रश्न यह उठता है क्या सच में ऐसा है ??

             यूँ तो भारत के संविधान के अनुसार इसके हर एक नागरिक को समान नागरिक संहिता (सभी नागरिक समान )लागू है ,लेकिन असलियत कुछ और ही है। समाज का एक वर्ग है जिसने अपने को इस देश के ‘कानून और संविधान” सबसे ऊपर उठा कर रखा है और खुद के वर्ग के लोगों के लिए एक अलग कानून “मुस्लिम पर्सनल लॉ” बना रखा है । और हमेशा से इनकी मांग रही है के इनके कानून के अनुसार ही इनके मसलों का निपटारा किया जाये।

आज ही मुस्लिमों की “तीन तलाक” की प्रथा के बारे में समाचार सुन रहा था जिसके समर्थन में कई कारण दिए गए उन लोगों के द्वारा जो इस प्रथा का समर्थन करते हैं । और ये सोच के हँसी आती है के आज जब महिलाएं चाँद पे पहुँच रही है ,और कदम से कदम मिला के पुरुषों के साथ चल रही या फिर यूँ कहे के उनसे भी आगे हैं , अभी एक सप्ताह पहले की ही बात है जब देश की एक १८ वर्षीय बेटी हिमा दास ने देश का नाम ऊँचा किया । तब ऐसी तकियानुसी सोच रखने वाले भी लोग समाज में हैं जो महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले बस एक बच्चा पैदा करने की मशीन और भोग की वस्तु मानते हैं। उनके द्वारा अपनी बात के समर्थन में जो तथ्य दिए गए आप भी जानकर हैरान होंगे…

● कोर्ट तलाक की वैधता तय नहीं कर सकता ।
● निजी कानून में दखल न दे ।
● 4 शादी की प्रथा के कारण शादी करने में देरी न हो इसलिए 3 तलाक सही ।
         
            और भी कई ऐसे कई तथ्य कहे गए जिनको यहां कहा नहीं जा सकता ।
खैर ऐसे लोगों से मैं कुछ नहीं कह सकता वरन् मेरी एक गुजारिश कानून बनाने वालों और संविधान का पालन कराने वालों से है कि, अगर वर्गों के कानून के अनुसार ही न्याय होना है तो संविधान में संसोधन के तहत “समान नागरिक संहिता” को हटा देना चाहिए ,क्योंकि इसके साथ और मेरे देश के संविधान के साथ खिलवाड़ मैं नहीं सहन कर सकता ।

             और अंत में उन मुस्लिम माता-बहनों को मेरा नमन जिन्होंने इस कुप्रथा के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की है , देश सही मायनों में आप जैसों से “महान” है ।

            अंत में बस इतना कहूंगा ………… ” मेरा भारत महान “

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