..बस इतनी सी ख्वाहिश है.. (अभिषेक पांडेय)

कभी कही सुनी भी सुनाया करो ,

शाम ढले तो घर भी आया करो ,

अपनी फूलों सी मुस्कान से ,

कभी रोते हुए को भी हसाया करो ,

कोई कितना भी अमीर हो पर ,

उसे चाहत होती है प्यार की ,

कोई गुस्सा भी कभी कर जाए तो ,

उसे प्यार से ही मनाया करो ,

गर ठोकर भी कोई खाया हो तो ,

उसे हाथ बढ़ा सम्भलाया करो ,

गर बचा कोई जिद्द करने लगे तो ,

तब हाँ में हाँ भी मिलाया करो ,

उन सारे कसमो वादों को ,

बिन कहे ही हमसे निभाया करो ,

कितनी बचकानी हरकत हो मेरी ,

रख धैर्य हमे समझाया करो ,

तुझ सा ठहराव नहीं मुझमे ,

मेरे कदम से कदम मिलाया करो ,

यूँ गुस्सा कर क्या मिलेगा तुम्हे ,

मुस्कुरा कर सब ले जाया करो  !!

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