पच्चीस दिन बीत गए | सिंगापुर से दिल्ली, दिल्ली से छपरा, वहां से बेगूसराय, वहां से पटना और फिर दिल्ली – आज दिल्ली से सिंगापुर – ये बीता महीना काफ़ी इवेंटफ़ुल रहा | अपनों से मिली, उनके साथ वक़्त बिताया और नयी यादें बस्ते में बटोर कर ले जा रही | अपनी वेबसाइट के लिए भी काफ़ी काम किया – इंटरव्यू , इवेंट्स – जिन-जिन चीज़ों का अवसर मिला, उसका पूरा सदुपयोग किया | पर्सनल और प्रोफ़ेशनल दोनों फ्रंट्स पर संतोषजनक ट्रिप के बाद आज अपने घर लौट रही |

आंसू तो हर घर से निकलते हुए मोती की तरह टपक जाते हैं, मायका हो या ससुराल – लगाव तो हर घर से उतना ही होता है | लेकिन अजीब बात ये है कि एक अन्जान देश और अजनबी समाज में भी आपको घर होने का एहसास हो सकता है – अगर आप मकान में रहते हुए उसकी दीवारों को प्यार और सम्मान से सींचते हों | जब पहली बार सिंगापुर गयी थी तब एक उत्साह था कि विदेश जा रही – आज दो साल बाद वो परदेस भी घर सा लगता है |

चलिए, आप सब ने भी इस ट्रिप में मेरे साथ मेरी भावनाओं को जीया | आपने बहुत साथ दिया मेरा, उसके लिए आपकी आभारी रहूंगी | जो दोस्त वक़्त निकाल कर मिले, उन्हें भी दिल से थैंक्स 🙏🏻 जो नहीं मिल सके, कोई बात नहीं , नेक्स्ट टाइम | चलती हूँ, अलविदा | कल से आपके लिए बहुत सारी नयी स्टोरीज़ लेकर होंगी | मिलते हैं |

P.S. Feature Image Credit – Siddharth Katragadda (Parrot Series Abstract)

By Surabhi Pandey

Surabhi Pandey, a former Delhi Doordarshan presenter, is a journalist currently based in Singapore. She is the author of ‘Nascent Wings’ and ‘Saturated Agitation’ and has contributed to over 15 anthologies in English and Hindi in India and Singapore. She writes on topics related to lifestyle and travel and is an active reporter on the tech startup ecosystem in Southeast Asia. She is the editor and founder of The Vent Machine.

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