सर पे चार-चार पिता स्वरुप पेड़ों की छांव में ज़िन्दगी कड़ी से कड़ी धूप भी बिना झुलसे निकल जाती है | नाना जी, पापा (दादा जी), डैडी और पापा (ससुर जी) को फादर्स डे पर प्रणाम और प्यार |

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