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Month: January 2018

#Features

The World Has Reached To Humandroids While We Are Still Debating Evolution

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As if we have a dearth of issues that make our heads hang in shame and embarrassment on the international diaspora. We keep getting a new one each day. Why do these bizzare things keep happening in our country? Have […]

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#हिंदी रचनायें

अस्तित्व

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कि बटुए से झांकती वो शिल्पा की लाल बिंदी की पत्ती, एक अलग कहानी सुनाती है… तुम्हारे बदन पे जचती जीन्स और जैकेट से परे, किसी और पहचान की दास्तान बताती है…   कि तुम्हारी छोटी सी ब्लैक ड्रेस के […]

#हिंदी रचनायें

सरस्वती पूजा, मेरा बचपन और भारत

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सरस्वती पूजा के साथ बचपन की ढेर सारी यादें जुड़ी हैं । अब कहाँ नसीब होता है वो सब । जैसा की आप सब जानते ही हैं, मेरा बचपन बिहार के बेगूसराय ज़िले में बीता है । हमारे यहाँ हर […]

#हिंदी रचनायें

“दही चूड़ा” और बिहार

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मैं 2008 में बारहवीं की परीक्षा के बाद दिल्ली चली गयी थी | आठ वर्ष तक पत्रकारिता की पढाई व नौकरी में इसी शहर में जूझती रही | कई दफ़े त्योहारों पे घर जा पाती तो कई बार पी.जी. या हॉस्टल […]

#Features

After 70 Years Of Independence, Divide And Rule Is Still Wrecking The Nation

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The entire concept of the caste system makes me feel nauseous. Division of people into different classes on the basis of birth is one of the most orthodox social traditions and should have gone with the likes of sati and untouchability. The […]

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