कि अँधेरा घना है
कोई नयी बात नहीं है ये
कुछ अचानक नहीं हुआ
मालूम था शुरुआत से क़ि
जब तक काम की हूँ
तभी तक नाम की हूँ

कि अँधेरा घना है
था हमेशा से, लेकिन छुपा हुआ था
अब सामने है
डर नहीं लग रहा
ये कहना झूठ होगा
लेकिन तैयार थी इस दिन के लिए
तो ठीक ही है

लेकिन ये बात तो सच है
कि अँधेरा घना है
चलना भी अकेले ही है
मालूम तो सब था
अब बस वो घड़ी आ गयी है
तो खुद को समझा रही हूँ
कि चल
मत डर
अकेलेपन में दुःख ज़रूर है लेकिन
काम से काम धोखा नहीं

कि अँधेरा घना है
लेकिन बेहतर है
झूठी तसल्लियों से
झूठे वादों से
और झूठी बातों से

वैसे उजाले से तो भला- ये अँधेरा घना है-