हिंदी रचनायें

नैन्सी

पागल सी है झल्ली सी है
फिर भी अच्छी लगती है
इस खोखली झूठी दुनिया में
एक वो है जो सच्ची लगती है

हम सबको हसाती है, जाने क्या क्या बोल के
जो दिल में हो वो कहती है बिना कुछ भी तोल के

यूँ तो नन्ही सी बच्ची है, लेकिन है एक मिसाल
जिस कदर ज़िन्दगी जीती है, मानो हो बेमिसाल

बुद्धू सी है चंचल सी है
फिर भी कितनी अच्छी है
कुटिल ख़राब और नाकाबियों के बीच
एक नैन्सी ही दिल की सच्ची है

काम का है अंदाज़ निराला
उस जैसा यहाँ पे कोई नहीं
जब सेल्स करवाने पे उतरे तो
उसकी टक्कर का कोई नहीं

पागल सी है झल्ली सी है
फिर भी अच्छी लगती है

इस खोखली झूठी दुनिया में
एक वो है जो सच्ची लगती है…

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