हिंदी रचनायें

यूँ ही

न इसके लिए अच्छी ना उसके लिए काफ़ी
न इसके हिसाब से ना उसके मुताबिक़

क्या है तरीका ए मालिक़ बता दो
कि कर सकूँ कुछ अच्छा तुम मुझको दुआ दो

चाहे जितने भी कर लूँ मैं जतन
नहीं होता काफ़ी रह जाता है कम

न इसके लिए अच्छी ना उसके लिए काफ़ी
न इसके हिसाब से ना उसके मुताबिक़

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