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यूँ ही

न इसके लिए अच्छी ना उसके लिए काफ़ी
न इसके हिसाब से ना उसके मुताबिक़

क्या है तरीका ए मालिक़ बता दो
कि कर सकूँ कुछ अच्छा तुम मुझको दुआ दो

चाहे जितने भी कर लूँ मैं जतन
नहीं होता काफ़ी रह जाता है कम

न इसके लिए अच्छी ना उसके लिए काफ़ी
न इसके हिसाब से ना उसके मुताबिक़

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Travel blogs, opinion pieces, celebrity interviews, poetry and musings - The Vent Machine is a one-stop destination for all blog-reading cravings.

Comments

November 23, 2016 at 9:55 pm

You are perfect..



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