बड़े दिनों बाद लिख रही

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आज बड़े दिनों बाद लिख रही
व्यस्त थी, सफर कर रही थी…

घर जाकर आना एक भावुक चर्या रही है
हमेशा
इस बार कुछ ज़्यादा सराबोर थी छुट्टियां भावनाओं से
इस बार घर से बस्ता उठा के चली
तो सिर्फ अपने आशियाने को अलविदा नहीं कहा
अलविदा कहा कुंवारेपन को
अलविदा कहा सुरभि पांडेय के अस्तित्व को

एक महीने बाद मेरी शादी है
तो अगली बार मैं घर से जाने के लिए घर आऊंगी
नया नाम, नया अस्तित्व, नया परिवार पाऊंगी
किसी की बेटी थी, अब किसी की बहू बन जाऊंगी

एक बात डराती है, हर घड़ी सताती है
इन सामाजिक दस्तूरों में कहीं मैं खुद को खो ना दूँ
हर पल ऐसा लगता है , ना जाने किसी बात पर मैं रो ना दूँ …

और नहीं लिख पाऊंगी..
रहने देती हूँ

About Post Author

Surabhi Pandey

A journalist by training, Surabhi is a writer and content consultant currently based in Singapore. She has over seven years of experience in journalistic and business writing, qualitative research, proofreading, copyediting and SEO. Working in different capacities as a freelancer, she produces both print and digital content and leads campaigns for a wide range of brands and organisations – covering topics ranging from technology to education and travel to lifestyle with a keen focus on the APAC region.
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4 thoughts on “बड़े दिनों बाद लिख रही

  1. Khood ko khone ka sawal kahaan.
    Apne astitva ko pura karna hai.Isliye to larkiyaan shaadi ke baad param saubhagyavati kehlati hain.Rone ki nahi sapne sajane ki ghari hai ye.
    Nayi khushiyoon ka intjaar karo.
    God bless u.

  2. वाह वाह बहुत सुंदर
    दिल को छूने वाला

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