माना मैं थोड़ी खुले मिजाज़ की हूँ
आज़ाद ख़यालों की हूँ, बेबाक जज़्बात हैं मेरे
लेकिन ए दोस्त, मैं बेवफा नहीं

माना मुझे हसना बोलना पसंद है
माना मैं थोड़ी उन्मुक्त स्वभाव की हूँ
लेकिन ए हमसफ़र, मैं सिर्फ़ तेरी हूँ

दूसरों की बातों में मत आया कर
अपने दिल की सुन, खुद को समझाया कर

मैं कोई पंछी नहीं, जिसे तू पिंजरे में कैद कर लेगा
मैं एक ख्वाब हूँ, जिसे प्यार से प्यार कर – तो जी लेगा
मैं कोई मुजरिम नहीं, जिसे जेल में बन्द करना पड़े
मैं एक हँसी हूँ, जिसे तू रज़ामंद कर आँखों में भरे

माना मेरी बेबाकी से तू थोड़ा दर जाता है !
बस इतनी सी बात तू क्यू नहीं समझ पाता है ?
तू जो है, तू सब कुछ है
तू जो है, वो कोई और नहीं
तू मेरा है, मैं तेरी हूँ
हमारे बीच कोई दीवार नहीं

मैं नए ख्याल रखती हूँ, पर संस्कार अपने भूली नहीं
मैं पढ़ी लिखी, नवीन सोच की हूँ, लेकिन जड़ों से जुडी हुई
तू मत डर, बस प्यार कर, बेफिक्र रह तू उम्र भर

वादा किया है, निभाऊंगी; दूर तुझसे कभी ना जाऊंगी
तू मेरा है , मैं तेरी हूँ – तेरे बिन नहीं जी पाऊँगी….

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