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सफ़र को ख़ूबसूरत हमसफ़र ही बनाता है…

ये सच है… सही इंसान के साथ हाईवे के ढाबे पर बैठ कर एक प्याली चाय और पराठे में भी ख़ासियत नज़र आती है…. उसके साथ सफ़र इतना हसीं लगने लगता है कि मंज़िल तक पहुंचने की चिंता भी धूमिल सी हो जाती है… ज़िन्दगी में ज़िन्दगी भर जाती है… सब कुछ थमा  हुआ ठहरा हुआ होते हुए भी तेज़ी से बढ़ता हुआ लगता है…

वो पल दिल में अपने लिए एक ख़ास जगह बन लेते हैं.. उन पलों में सुकून होता है, ख़ुशी होती है, सच्चाई होती है..

सड़क दर सड़क पार करते हुए… चौराहे और दो राहों में सही रास्ते का चुनाव करते हुए, जब हम धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं तो पता ही नहीं लगता कि हम ज़िन्दगी कि उधेड़-बुन से कितने दूर आ गए.. जैसे सारी परेशानियां कहीं पीछे छूट गयी हों… हम अपना सच जीने लगते हैं…सपनो को सच मान कर महसूस करने लगते हैं… ऐसा लगने लगता है जैसे सब कुछ अच्छा है… ख़ूबसूरत है… बस उस हमसफ़र का हाथ, हाथ में हो… उसकी आँखों में अपने लिए बेपनाह प्यार झलके और उसकी बातों में सिर्फ हमारा ज़िक्र हो…

सफ़र को ख़ूबसूरत हमसफ़र ही बना सकता है …

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Comments

July 19, 2016 at 12:37 pm

Waahhh mam you will leave Ghaalib behind you😗😗



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